African Swine Flu

चीन से कोरोना के बाद एक और नया वायरस अफ्रीकन स्वाइन फ़्लू (AFS) फैल रहा है। भारत में AFS का पहला मामला असम से आया है, जहाँ करीब 2,900  सूअरों को मार दिया गया है। यह वायरस सामान्यतः जंगली सूअरों में पाया जाता है, लेकिन ये पालतू सूअरों को भी संक्रमित कर सकता हैं।   

अधिकारियों ने कहा कि वे अभी तक AFS रहस्य का पता नहीं लगा पाए हैं। ये वायरस पहली बार केन्या में 1921 में सामने आया था।  इस बीमारी की रिपोर्ट भारत में पहले कभी नहीं हुई थी। राज्य के पशुपालन और पशु चिकित्सा विभाग द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों में कहा गया है कि मंगलवार शाम 5 बजे तक 2,904 सुअर मर चुके थे। यह मौतें छह पूर्वी असम जिलों में 310 गांवों में मौतें हुईं।

मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने पशुपालन और पशु चिकित्सा और वन विभागों के अधिकारियों को आईसीएआर के राष्ट्रीय सुअर अनुसंधान केंद्र (भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद) के साथ काम करने और सूअरों की मौतों पर अंकुश लगाने के लिए एक प्रभावी रोडमैप तैयार करने का निर्देश दिया है।

असम और अरुणाचल प्रदेश में AFS के प्रकोप के कारण, उत्तर-पूर्व में सभी राज्य सरकारों हाई अलर्ट घोषित कर दिया है और लोगों से, विशेषकर सूअर के मालिकों से, अन्य राज्यों से सूअर लाने से परहेज करने के लिए कहा गया है।

2019 की  पशु गणना के अनुसार, राज्य में 21 लाख घरेलू सूअर हैं और 7 लाख से अधिक किसान पूर्वोत्तर में मांस के लिए इनका पालन करते हैं, जिनका सालाना टर्नओवर कम से कम 8,000 करोड़ रुपये है।

AFS के लक्षण

AFS के लक्षण और मृत्यु दर वायरस और सुअर के प्रकार / प्रजातियों के अनुसार भिन्न-2 हो सकती  है।

उच्च बुखार, अवसाद, एनोरेक्सिया और भूख में कमी, त्वचा में रक्तस्राव (कान, पेट और पैरों पर त्वचा की लालिमा), गर्भवती के गर्भपात, साइनोसिस, उल्टी, दस्त आदि  AFS प्रमुख लक्षण हैं। इसकी मृत्यु दर 100% तक हो सकती है।

(Image Source:- Drishti Ias)

सबस्यूट और क्रोनिक रूप मामूली या कम वायरलेंट वायरस के कारण होते हैं, जो कम तीव्र नैदानिक ​​संकेत उत्पन्न करते हैं जो अधिक लंबे समय तक व्यक्त किए जा सकते हैं। मृत्यु दर कम है, लेकिन अभी भी 30-70% तक हो सकती है।

रोकथाम और नियंत्रण

वर्तमान में, एएसएफ के लिए कोई अनुमोदित टीका नहीं है।

चीन अगस्त 2018 से अफ्रीकी सूअर बुखार से जूझ रहा है, दुनिया के शीर्ष पोर्क निर्माता में बीमारी तेजी से फैलने के बाद, लाखों सूअर मारे गए और सूअर की कीमतें बढ़ गई।

क्या ये वायरस इंसानों को संक्रमित कर सकता है :

AFS का पहली बार 1921 में केन्या में पता चला था। अभी तक इसके लिए कोई टीका या दवाई नहीं खोजी गई हैं। कुछ विशेषज्ञों के अनुसार, मनुष्य AFS द्वारा संक्रमित नहीं होता है, लेकिन वे वायरस के वाहक हो सकते हैं।

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