Chemistry Notes (Part-12)

आवर्त सारणी (Periodic Table)

तत्वों का वर्गीकरण (Classification of Elements)

  • सन् 1869 में एशियन वैज्ञानिक मेन्डलीफ ने तत्वों का प्रथम आवर्ती वर्गीकरण दिया।
  • तत्वों के गुण, उनके परमाणु भारों के आवर्ती फलन हैं।
  • मेन्डलीफ के समय में 63 ज्ञात तत्व थे जिन्हें उन्होंने सात आवर्ती (क्षैतिज कॉलमों) तथा आठ वर्गों (खड़े कॉलमों) में बाँटा।
  • आधुनिक आवर्त नियम के अनुसार, “तत्वों के गुण, उनके परमाणु क्रमांकों के आवर्ती फलन हैं।”
  • मेन्डलीफ की संशोधित आवर्त सारणी को 18 खड़े कॉलम (जिन्हें समूह कहते हैं) तथा सात क्षैतिज कॉलमों (जिन्हें आवर्त कहते हैं) में बाँटा गया।
  • आवर्तों के सामान्य लक्षण प्रत्येक आवर्त में बायें से दाये जाने पर तत्वों में संयोजी इलेक्ट्रॉनों की संख्या 1 से 8 तक बढ़ती है।
  • आवर्ती में तत्वों को बढ़ते हुए परमाणु क्रमांक के अनुसार रखा गया है।
  • आवर्गों में बायें से दाये जाने पर तत्वों की संयोजकता पहले एक से चार तक बढ़ती है, फिर 4 से 1 तक क्रमशः घटती है।
  • आवर्गों में बायें से दाये जाने पर परमाणु का आकार क्रमशः घटता है। प्रत्येक आवर्त में बायें से दायें चलने पर तत्व का धनात्मक गुण घटता है।
  • प्रत्येक आवर्त में बायें से दायें चलने पर परमाणु का आकार घटने के कारण, तत्वों की धात्विकता भी घटती जाती है।
  • प्रत्येक आवर्त में बायें से दाये जाने पर तत्वों का अपचायक गुण घटता है।
  • प्रत्येक आवर्त में बायें से दाये जाने पर ऑक्साइडों का क्षारीय गुण घटता है।
  • प्रत्येक आवर्त में बायें से दाये जाने पर ऋणविद्युती प्रकृति, अधात्विक प्रकृति तथा ऑक्साइडों का अम्लय गुण क्रमशः बढ़ता है।
  • प्रत्येक आवर्त में बायें से दाये जाने पर आयनन विभव क्रमशः बढ़ता है।
  • प्रत्येक आवर्त में बायें से दाये जाने पर इलेक्ट्रॉन बन्धुता भी सामान्यत: बढ़ती है।

 

वर्गों के सामान्य लक्षण

  • आवर्त सारणी में वर्गों के सभी तत्वों में संयोजी इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान होती है।
  • प्रत्येक समूह में ऊपर से नीचे जाने पर परमाणु त्रिज्या में वृद्धि होती है।
  • प्रत्येक समूह में ऊपर से नीचे जाने पर धन-विद्युती प्रकृति, धात्विकता, अपचायक गुण तथा ऑक्साइडों का क्षारीय गुण क्रमशः बढ़ता है।
  • प्रत्येक समूह में ऊपर से नीचे जाने पर ऋणविद्युती प्रकृति, अधात्विकता, तथा ऑक्साइडों का अम्लीय गुण परमाणु क्रमांक बढ़ने के साथ-साथ घटता है।
  • आवर्त सारणी में, समूह में ऊपर से नीचे जाने पर आयनन विभव, इलेक्ट्रॉन बन्धुता क्रमशः घटते हैं।

 

हाइड्रोजन तथा उसके यौगिक (Hydrogen and its compounds)

  • हाइड्रोजन आवर्त सारणी का प्रथम तत्व है।
  • हाइड्रोजन के तीन समस्थानिक होते हैं। प्रोटियम या हल्की हाइड्रोजन (1H1), ड्यूटीरियम या भारी हाइड्रोजन (1H2, D) और ट्राइटियम(1H3, T)।
  • ट्राइटियम हाइड्रोजन का रेडियोएक्टिव समस्थानिक है।
  • हाइड्रोजन सोडियम के साथ ऑक्सीकारक का कार्य करता है।
  • जल हाइड्रोजन का उदासीन ऑक्साइड है।
  • शुद्ध जल का क्वथनांक 100°C तथा हिमांक 0°C होता है।
  • शुद्ध जल एक ध्रुवीय यौगिक है। (द्विध्रुव आघूर्ण = 1.85D) तथा इसका डाइइलेक्ट्रिक स्थिरांक उच्च होता है।
  • जियोलाइट जल के शुद्धिकरण में प्रयोग होता है।
  • भारी जल भारी हाइड्रोजन का ऑक्साइड होता है।
  • भारी जल का क्वथनांक 101.42°C तथा हिमांक 3.8°C होता है।
  • भारी जल नाभिकीय रिएक्टर में मन्दक के रूप में प्रयोग किया जाता है।
  • हाइड्रोजन परॉक्साइड, हाइड्रोजन का अम्लीय ऑक्साइड है।
  • हाइड्रोजन परॉक्साइड में ऑक्सीजन (-1) ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करती है।
  • हाइड्रोजन परॉक्साइड का 30% विलयन ऑक्सीकारक और अपचायक के रूप में प्रयुक्त होता है।
  • हाइड्रोजन परॉक्साइड रेशम, ऊन, पंख आदि कोमल वस्तुओं का विरंजन करने में प्रयुक्त होता है।
  • हाइड्रोजन परॉक्साइड का उपयोग, पुराने तेल चित्रों का सफेद रंग काला पड़ जाने पर उनको पुन: सफेद करने में होता है।
  • वायु में उपस्थित हाइड्रोजन सल्फाइड द्वारा लैड के यौगिक काले पड़ जाते हैं, क्योंकि काला लैड सल्फाइड बन जाता है। हाइड्रोजन परॉक्साइड काले PbS को सफेद PbSO, में ऑक्सीकृत कर देता है।

 

ईंधन (Fuel)

  • जो पदार्थ जलने पर ऊष्मा उत्पन्न करते हैं, ईंधन कहलाते हैं। ईंधन को जलाकर विभिन्न कार्यों के लिये ऊष्मा प्राप्त की जाती है, जैसे: कोयला, लकड़ी, मिट्टी का तेल, पेट्रोल, डीजल आदि।
  • ईंधन जैसे लकड़ी, कोयला, केरोसीन तेल, एल.पी.जी. (LPG), चारकोल आदि घरेलू ईंधन के रूप में प्रयोग किये जाते हैं। एल.पी.जी. (LPG) में गैस रिसाव का पता लगाने के लिये इसमें एक तीक्ष्ण गन्ध वाला पदार्थ एथिल मकैप्टन (C2H2SH) मिला देते हैं जिसकी गन्ध H,S के समान होती है जिससे आसानी से गैस रिसाव का पता चलाया जा सकता है।
  • पेट्रोल, कार तथा वायुयान में ईंधन के रूप में प्रयोग किया जाता है, जबकि डीजल, ट्रक, बस, रेलगाड़ी तथा जहाज में ईंधन के रूप में प्रयोग किया जाता है।
  • पेट्रोल या गैसोलीन की गुणवत्ता ऑक्टेन संख्या के रूप में मापी जाती है। अतः वह ईंधन जिसकी ऑक्टेन संख्या जितनी अधिक होगी वह उतना ही अधिक उत्तम होगा।
  • कृत्रिम रबड़, द्रवित अमोनिया तथा द्रवित हाइड्रोजन, रॉकेट में नोदक की तरह प्रयोग किये जाते हैं।

 

बायो गैस (Bio-gas)

  • जन्तु एवं वनस्पति अवशेष बड़ी आसानी से अनॉक्सी सूक्ष्म जीवों द्वारा पानी की उपस्थिति में अपघटित हो जाते हैं, फलस्वरूप मिथेन, कार्बन मोनो- ऑक्साइड, हाइड्रोजन तथा हाइड्रोजन सल्फाइड जैसी गैसें उत्पन्न होती हैं। गैसों के इसी मिश्रण को जैव गैस या बायो गैस कहा जाता है।
  • बायो-गैस घरेलू उपयोग में एक अच्छा ईंधन माना जाता है।
  • बायो-गैस के अवयव: मिथेन (CH4) 45-70%, कार्बन डाईऑक्साइड, हाइड्रोजन सल्फाइड आदि।
  • लकड़ी के भंजक आसवन से निम्नलिखित पदार्थ प्राप्त होते हैं:
  • काष्ट गैस (गैसीय), कोल तार (द्रव), चारकोल (ठोस अवशेष), मेथिल एल्कोहॉल (द्रव) तथा एसीटिक एसिड।
  • कोयले के भंजक आसवन से निम्नलिखित पदार्थ प्राप्त होते हैं:
  • कोल गैस (H2 + CH4 + CO), जलीय अमोनिया द्रव, कोल तार, कोक, भाप अंगार गैस (CO+ H2), अर्द्ध भाप अंगार गैस ( भाप अंगार गैस + प्रोड्यूसर गैस), प्रोड्यूसर गैस (N2 + CO)।

 

गोबर गैस

  • पशुओं के गोबर के किण्वनीकरण द्वारा बनाई जाती है।
  • इसके मुख्य अवयव CH4 कार्बन डाईऑक्साइड तथा हाइड्रोजन हैं।
  • ज्वाला, आग का एक गरम क्षेत्र होता है, जिसमें गैसीय पदार्थों का जलना होता है। समस्त ज्वलनशील पदार्थ ज्वाला के साथ जलते हैं।

 

रासायनिक पदार्थों के व्यापारिक तथा रासायनिक नाम एवं सूत्र

 

क्र.सं.व्यापारिक नामसूत्ररासायनिक नाम
1.साधारण लवणसोडियम क्लोराइडNaCl
2.चिली साल्टपीटरसोडियम नाइट्रेटNaNO3
3.सुहागाबोरेक्सNa2B4O7.10H2O
4.खाने का सोडासोडियम बाइकार्बोनेटNaHCO3
5.धावन सोडासोडियम कार्बोनेटNa2CO3. 10H2O
6.कास्टिक सोडासोडियम हाइड्रॉक्साइडNaOH
7.तूतिया (नीला थोथा)कॉपर सल्फेटCuSO4.5H2O
8.उजला थोथा (सफेद कसीस)जिंक सल्फेटZnSO4.7H2O
9.हरा कसीसफेरस सल्फेटFeSO4.7H2O
10.संगमरमरकैल्शियम कार्बोनेटCaCO3
11.कली चूनाकैल्शियम ऑक्साइडCaO
12.भखरा चूनाकैल्शियम हाइड्रॉक्साइडCa(OH)2
13.सिन्दूरमरक्यूरिक सल्फाइडHgS
14.शोरापोटेशियम नाइट्रेटKNO3
15.शोरे का अम्लनाइट्रिक एसिडHNO3
16.नमक का अम्लहाइड्रोक्लोरिक एसिडHCI
17.गंधक का अम्लसल्फ्यूरिक एसिडH2SO4
18.नौसादरअमोनियम क्लोराइडNH4CI
19.लाफिंग गैसनाइट्रस ऑक्साइडN2O
20.जिप्समकैल्शियम सल्फेटCaSO4.2H2O
21.शुष्क बर्फ (ड्राइ आइस)ठोस कार्बन डाइऑक्साइडCO2
22.फिटकरीपोटेशियम एल्युमीनियम सल्फेटK2SO4AI2(SO4)3.24H2O
23.गैलेनालेड सल्फाइडPbS
24.टी.एन.टी. (TNT)ट्राई नाइट्रोटाल्वीनC6H2CH3(NO2)3
25.कास्टिक पोटाशपोटेशियम हाइड्रॉक्साइडKОН
26.विरंजक चूर्णब्लीचिंग पाउडरCa(OCI)CI
27.प्लास्टर ऑफ पेरिसकैल्शियम सल्फेट हाफ हाइड्रेट(CaSO4)2.H2O
28.साल्ट केकसोडियम सल्फेटNa2SO4
29.ग्लोबर लवणसोडियम सल्फेटNa2SO4.10H2O
30.बालूसिलिकन ऑक्साइडSiO2
31.अम्लराजनाइट्रो-हाइड्रोक्लोरिक एसिड3HCI+HNO3
32.भारी जलड्यूटेरियम ऑक्साइडD2O
33.श्वेत पोटाशपोटेशियम क्लोरेटKCIO3
34.हाइड्रोजन परॉक्साइडहाइड्रोजन परॉक्साइडH2O2
35.चाईनीज श्वेतजिंक ऑक्साइडZnO
36.हाईपोसोडियम थायोसल्फेटNa2S2O3.5H2O
37.मार्श गैसमिथेनCH4
38.एल्कोहॉलइथाइल एल्कोहॉलC2H5OH
39.चीनीसुक्रोजC12H22O11

 

 

कुछ तत्वों के रासायनिक सूत्र व अयस्क (Chemical Formule & Ore of Some Elements)

 

क्र.सं.तत्वों के नामअयस्करासायनिक सूत्र
1.एल्युमीनियम (AI)बॉक्साइट, कोरंडम, क्रायोलाइटAI2O3.2H2O; Al2O3; Na3AIF6
2.लोहा (Fe)हेमेटाइट, मैग्नेटाइटFe2O3; Fe3O4
3.ताँबा (Cu)कॉपर ग्लांस, कॉपर पाइराइट्सCu2S; CuFeS
4.जस्ता (Zn)जिंकब्लेड, केलामाइन या जिंक स्पारZnS
5.सोडियम (Na)रॉक साल्ट, सोडियम कार्बोनेटNaCl; Na2CO3
6.पोटेशियम (K)कार्नेलाइट, शोराKCI MgCl2.6H2O; KNO3
7.सीसा (Pb)गैलेनाPbS
8.टिन (Sn)टिन पाइराइट्स, कैसिटेराइटCu2FeSnS4; SnO2
9.चाँदी (Ag)सिल्वर ग्लांसAg2S
10.सोना (Au)कैल्वेराइट, पेटसाइटAuTe2; Ag(Au)2Te
11.पारा (Hg)सिनेबार, कैलोमलHgS; Hg2Cl2
12.मैग्नीशियम (Mg)डोलोमाइट, कार्नेलाइटMgCO3.CaCO3; KCI. MgCl2.6H2O
13.कैल्शियम (Ca)लाइम स्टोन, डोलोमाइटCaCO3; MgCO3. CaCO3
14.फॉस्फोरस (P)फॉस्फोराइट, फ्लोरएपेटाइटCa3(PO4)2; 3Ca3 (PO4)2.CaF2

 

 

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