Chemistry Notes (Part-4)

 

परमाणु संरचना (Atomic Structure)

 

डाल्टन का परमाणु सिद्धान्त (Dalton’s Atomic Theory)

  • सन् 1808 में जॉन डाल्टन ने परमाणु सिद्धान्त दिया। जिसके अनुसार प्रत्येक तत्व (पदार्थ या द्रव्य) अति सूक्ष्म, अविभाज्य कणों से मिलकर बना होता है, जिन्हें परमाणु कहते हैं।
  • परमाणु को न बनाया जा सकता है और न ही नष्ट किया जा सकता है।
  • एक ही तत्व के सभी परमाणु, भार, आकार तथा अन्य गुणों में समान होते हैं, किन्तु दूसरे तत्वों के परमाणुओं से भिन्न होते हैं।
  • एक ही यौगिक के समस्त यौगिक परमाणु आपस में समान होते हैं। इनमें प्रत्येक तत्व के परमाणुओं की निश्चित स्थायी संख्या उपस्थित रहती है।

 

परमाणु (Atom)

तत्व का वह सूक्ष्म कण, जिसमें पदार्थ के सभी गुण होते हैं तथा रासायनिक क्रिया में भाग लेता है, परमाणु

कहलाता है। परमाणु के तीन मूल कण हैं: इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन तथा न्यूट्रॉन।

 

इलेक्ट्रॉन (e)

प्रकृति: ऋणावेशित, सन् 1909 में मिलिकन द्वारा तेल-बूंद विधि द्वारा निर्धारित।

खोजकर्ता: जे० जे० थॉमसन।

आवेश: 1.602×10-19 कूलॉम

द्रव्यमान: 9.109535×10-28 ग्राम

e/m अनुपात: 1.76×108 कूलॉम/ग्राम

 

प्रोटॉन (P+)

प्रकृति: धनावेशित

खोजकर्ता: ई० रदरफोर्ड

आवेश: 1.602 x 1019 कूलॉम

द्रव्यमान: 1.672×10-24 ग्राम

 

न्यूट्रॉन (n)

प्रकृति: आवेशहीन

खोजकर्ता: जेम्स चैडविक

द्रव्यमान: 1.675 x 10-24 ग्राम

 

अणु (Molecule)

पदार्थ का वह अति सूक्ष्म कण, जो स्वतन्त्र अवस्था में रह सकता है, अणु कहलाता है। यौगिकों के अणुओं में दो या दो से अधिक प्रकार के परमाणु होते हैं।

 

कैथोड किरणों के गुण (Characteristics of Cathode Rays)

  • ये किरणे सोधी रेखा में चलती हैं तथा ये अपने पथ के मध्य रखी ठोस वस्तु की छाया उत्पन्न करती हैं।
  • ये किरणे ऋणावेशित होती हैं तथा यांत्रिक प्रभाव उत्पन्न करती हैं। कैथोड किरणों में उपस्थित आवेशित कण इलेक्ट्रॉन कहलाते हैं।

 

ऐनोड किरणों के गुण (Characteristics of Anode Rays)

  • ये किरणें सीधी रेखा में चलती हैं तथा यांत्रिक प्रभाव उत्पन्न करती हैं।
  • ये किरणे धनावेशित होती हैं।

 

नाभिक (Nucleus)

  • खोजकर्ता- रदरफोर्ड
  • परमाणु के मध्य में एक अति सूक्ष्म पिण्ड होता है जिसे नाभिक कहते हैं। नाभिक में परमाणु का समस्त धनावेश तथा द्रव्यमान स्थित रहता है।

 

परमाणु क्रमांक (Atomic Number)

  • किसी तत्व के परमाणु में उपस्थित प्रोटॉनों की संख्या, परमाणु क्रमांक के बराबर होती है, अर्थात्
  • परमाणु क्रमांक = प्रोटॉनों की संख्या = इलेक्ट्रॉनों की संख्या

 

द्रव्यमान संख्या (Mass Number)

  • किसी तत्व के परमाणु के नाभिक में उपस्थित प्रोटॉनों तथा न्यूट्रॉनों की संख्या के योग को द्रव्यमान संख्या कहते हैं अर्थात्
  • द्रव्यमान संख्या (परमाणु भार)

= प्रोटॉनों की संख्या + न्यूट्रॉनों की संख्या

= परमाणु संख्या + न्यूट्रॉनों की संख्या

= इलेक्ट्रॉनों की संख्या न्यूट्रॉनों की संख्या

 

संयोजी इलेक्ट्रॉन (Valency Electron)

  • किसी तत्व के परमाणुओं द्वारा रासायनिक संयोग में स्थानान्तरण या साझे में प्रयुक्त इलेक्ट्रॉनों को उस तत्व के संयोजी इलेक्ट्रॉन कहते हैं। संयोजी इलेक्ट्रॉन जिस कोश में होते हैं उसे संयोजी कोश कहते हैं।
  • समान संयोजी इलेक्ट्रॉन वाले तत्वों के रासायनिक गुण भी समान होते हैं। ऐसे तत्व, जिनके परमाणुओं में संयोजी इलेक्ट्रॉनों की संख्या 1, 2 तथा 3 होती है, धातु कहलाते हैं तथा ऐसे तत्व, जिनके परमाणुओं में संयोजी इलेक्ट्रॉनों की संख्या 4,5,6 और 7 होती है अधातु कहलाते हैं।

 

समस्थानिक (Isotopes)

एक ही तत्व के परमाणुओं को जिनकी परमाणु संख्या समान हो परन्तु परमाणु द्रव्यमान संख्या भिन्न हो, समस्थानिक कहते हैं। उदाहरण:

1H1, 1H2, 1H3 हाइड्रोजन के समस्थानिक हैं।

6C12, 6C13, 6C14 कार्बन के समस्थानिक हैं।

8O16, 8O17, 8O18 ऑक्सीजन के समस्थानिक हैं।

तथा 10Ne20, 10Ne21, 10Ne22 निऑन के समस्थानिक हैं।

 

समभारी (Isobars)

विभिन्न तत्त्वों के ऐसे परमाणु, जिनकी द्रव्यमान संख्या समान होती है लेकिन परमाणु क्रमांक भिन्न-भिन्न होते हैं, समभारी कहलाते हैं। उदाहरण:

1H3, और 2He3; 18Ar40, 19K40 और 20ca40, 52Te130, 56Ba130 और 54Xe130

 

क्वाण्टम सिद्धान्त (Quantum Theory)

विकिरण के क्वाण्टम सिद्धान्त का प्रतिपादन सर्वप्रथम सन् 1900 में एक जर्मन वैज्ञानिक मैक्स प्लांक ने पूर्ण कृष्ण पिण्डों से उत्सर्जित होने वाले विकिरण की व्याख्या करने के लिये किया था। इस सिद्धान्त के अनुसार, ‘‘किसी प्रकाश-स्रोत से प्रकाश सतत ऊर्जा के रूप में उत्सर्जित नहीं होता बल्कि ऊर्जा के छोटे-छोटे बण्डलों या क्वाण्टम के रूप में उत्सर्जित होता है।” ऊर्जा के इन बण्डलों को फोटॉन कहते हैं। इसका तरंग दैर्घ्य निम्न प्रकार व्यक्त किया जा सकता है:

E = hv

 

हाइजेनबर्ग का अनिश्चितता सिद्धान्त (Heisenberg’s Uncertainity Principle)

सन् 1927 में जर्मन भौतिकशास्त्री वर्नर हाइजेनबर्ग ने अनिश्चितता के सिद्धान्त का प्रतिपादन किया इस सिद्धान्त के अनुसार, “किसी गतिशील कण के संवेग एवं स्थान का एक ही क्षण पर परिशुद्धता पूर्वक निर्धारण करना सम्भव नहीं है।”

Δx × Δp  ≥ h/4π

 

जहाँ Δx = इलेक्ट्रॉन के स्थान में अनिश्चितता

Δp = इलेक्ट्रॉन के संवेग में अनिश्चितता

 

क्वाण्टम यांत्रिकी सिद्धान्त (Quantum Mechanics Theory)

क्वाण्टम यांत्रिकी सिद्धान्त इरविन श्रोडिंगर नामक आस्ट्रियन वैज्ञानिक ने प्रतिपादित किया।

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