Chemistry Notes (Part-6)

अम्ल, क्षार, लवण तथा pH पैमाना (Acis, Base, Salt, pH Scale)

 

अम्ल

अम्ल ऐसे रासायनिक यौगिक हैं जो स्वाद में खट्टे होते हैं, नीले लिटमस पेपर को लाल कर देते हैं तथा सामान्यतः कुछ धातुओं से अभिक्रिया करके हाइड्रोजन गैस उत्पन्न करते हैं। अम्ल के उदाहरण –HNO3, HNO2, H2SO4, H3PO4, H3PO3, H2CO3 इत्यादि।

 

क्षार

क्षार ऐसे रासायनिक यौगिक हैं जो स्वाद में कड़वे होते हैं, लाल लिटमस पेपर को नीला कर देते हैं तथा जिनमें चिकनाहट होती है। क्षार के उदाहरण- NaOH, Ca(OH)2, KOH तथा RbOH इत्यादि।

जब एक अम्ल का जलीय विलयन क्षार के साथ मिलता है तो उदासीन अभिक्रिया घटित होती है।

 

pH मान

किसी विलयन में उपस्थित हाइड्रोजन आयन की सान्द्रता से उस विलयन के pH मान का निर्धारण होता है। pH मान 7.0 से अधिक होने पर कोई भी पदार्थ क्षारीय होता है तथा कम होने पर अम्लीय। मानव रक्त का pH मान क्षारीय (7.35 – 7.45) होता है।

 

सोडियम हाइड्रॉक्साइड14.0
अमोनिया11.0
खाने का सोडा8.3
मानव रुधिर7.4
शुद्ध जल7.0 (उदासीन)
दूध6.6
टमाटर4.5
शराब4.0
सेब3.0
सिरका2.2
नींबू रस2.0
बैटरी का अम्ल1.0
मानव मूत्र5.5 से 7.5
आँसू7.4
समुद्री जल8.5
गाय का दूध6.3 से 6.6

 

लवण

लवण का निर्माण अम्ल तथा क्षार के अभिक्रिया द्वारा होता हैं। जैसे –

 

HCI + NaOH    →       NaCl + H2O

(अम्ल) (क्षार)                   (लवण)

 

इस अभिक्रिया को उदासीनीकरण की क्रिया भी कहते हैं।

 

(i) सोडियम हाइड्राक्साइड (NaOH) या कास्टिक सोडा

व्यावसायिक स्तर पर इसका निर्माण नमक के प्रबल घोल के वैद्युत अपघटन के द्वारा होता है। इसे क्लोर अल्कली प्रक्रिया कहा जाता है। इसे निम्न अभिक्रिया द्वारा व्यक्त किया जाता है

2NaCl + 2H2O    →      H2 + CI2 + 2NaOH

 

उपयोग

(a) प्रयोगशाला में सोडियम हाइड्राक्साइड का प्रयोग क्षार के रूप में किया जाता है।

(b) इसका उपयोग पेपर, कपड़ा, पेय जल, साबुन तथा डिटरजेंट उद्योग में किया जाता है।

 

(ii) खाने का सोडा या सोडियम बाइकार्बोनेट (NaHCO3)

NaCl + H2O + CO2 + NH3    →      NH4Cl + NaHCO3

सोडियम बाइकार्बोनेट को गर्म करने से सोडियम कार्बोनेट में परिवर्तित हो जाता है।

           

NaHCO3    गर्म →   NaCO3 + H2O + CO2

 

उपयोग

(a) विभिन्न प्रकार के व्यंजन बनाते समय खमीर उठाने के लिए इसका प्रयोग किया जाता है।

(b) औषधि के रूप में यह अम्लपित्त को शांत करता है।

(c) आग बुझाने वाले यंत्रों में इसका प्रयोग होता है।

 

(iii) कपड़ा धोने का सोडा या सोडियम कार्बोनेट (Na2CO3.10H2O)

खाने वाले सोडे को गरम करके इसे प्राप्त किया जाता है। सोडियम कार्बोनेट पुनः रवाकरण के द्वारा धावन सोडा के रुप में परिवर्तित होता है।

उपयोग

(a) इसका उपयोग काँच, साबुन तथा कागज उद्योग में होता है।

(b) इसका उपयोग जल की स्थायी कठोरता को दूर करने में होता है।

 

(iv) ब्लीचिंग पाउडर या कैल्सियम हाइपो क्लोराइड (CaOCI2)

इसका रंग पीला होता है। इससे क्लोरीन की गंध निकलती है। इसका व्यापक उपयोग जल के शुदृष्टि किरण में होता है। यह एक ब्लीचिंग अभिकर्मक भी है।

Ca(OH)2 +2Cl2 +CaOCl2    →       CaCl2 +2H2O

इसका उपयोग तरण ताल (Swimming Pool) के निर्जीलीकरण हेतु भी होता है।

 

(v) प्लास्टर आफ पेरिस (CasO4.1/2 H2O)

जिप्सम को गरम करने पर यह प्राप्त होता है।

CasO4.2H2O   (गर्म)→       CasO4.1/2 H2O+3/2H2O

 

प्लास्टर आफ पेरिस सफेद रंग का पाउडर होता है।

जल के साथ गरम करने पर यह एक कठोर (जिप्सम) में परिवर्तित हो जाता है।

 

उपयोग

(a) इसका उपयोग खिलौने तथा बर्तन बनाने के साँचे के निर्माण में होता है।

(b) टूटी हुई हड्डियों को जोड़ने के लिए इसका प्रयोग होता है।

 

वैद्युत लेपन

विद्युत अपघटन की प्रक्रिया द्वारा एक धातु का लेपन दूसरे धातु पर करने को वैद्युत लेपन कहा जाता है। वैद्युत लेपन के प्रकार – ताम्र लेपन, चाँदी लेपन तथा क्रोमियम लेपन इत्यादि। विद्युत अपघट्य सेल में, एनोड धनात्मक तथा कैथोड ऋणात्मक होता है। जिस भाग को लेपित करना होता है उसे कैथोड बनाया जाता है। यह ऋणावेशित इलेक्ट्रोड होता है। कैथोड इलेक्ट्रान का स्रोत या दाता होता है। यह धनावेश को ग्रहण कर सकता है। जिस धातु पदार्थ का लेपन दूसरे धातु पर चढ़ाया जाना है उसे एनोड बनाया जाता है। जो धनावेशित होता है तथा इलेक्ट्रानों को आकर्षित करता है।

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