COMPUTER GENERATIONS

कम्प्यूटर की पीढ़ियाँ (Computer Generations)

 

प्रथम पीढ़ी (1940-1956)

कम्प्यूटर की प्रथम पीढ़ी की शुरूआत 1940 से मानी जाती है। इस जनरेशन में Vacuum Tube Technology का प्रयोग किया गया था। इसमें मशीन भाषा का प्रयोग किया गया था। इसमें मेमोरी की तौर पर चुम्बकीय टेप एवं पंचकार्ड का प्रयोग किया जाता था। इस पीढ़ी के कुछ कम्प्यूटरों के नाम इस प्रकार है- एनियक (ENIAC), एडसैक (EDSAC), एडवैक (EDVAC), यूनीवैक -2(UNIVAC-2), आईबीएम-701, आईबीएम-650, मार्क-2, मार्क-3, बरोज – 2202 (ENIAC)

 

द्वितीय पीढ़ी (1956-1963)

द्वितीय पीढ़ी की शुरूआत 1956 से 1963 तक मानी जाती है। इस पीढ़ी में Transistor का प्रयोग किया गया है। जिसका विकास Willon Shockly ने 1947 में किया था। इसमें असेम्बली भाषा का प्रयोग किया गया था। इसमें मेमोरी के तौर पर चुम्बकीय टेप का प्रयोग किया जाने लगा था। इस पीढ़ी के कम्प्यूटरों में आईबीएम-1401 प्रमुख हैं, जो बहुत ही लोकप्रिय एंव बड़े पैमाने पर उत्पादित किया गया था। इस पीढ़ी के अन्य कम्प्यूटर थे – IBM-1602, IBM-7094, CDS-3600, RCA-501, यूनिवेक-1107 आदि।

 

तीसरी पीढ़ी (1964-1971)

कम्प्यूटर की तीसरी पीढ़ी की शुरूआत 1964 से मानी जाती है। इस जनरेशन में आई. सी. (I.C.) का प्रयोग किया जाने लगा था। IC का पूरा नाम Intergrated Circuit है।

IC का विकास 1958 में Jack Kibly ने किया था। इसमें IC Technology (SSI) का प्रयोग किया गया था। SSI पूरा नाम Small Scale Integration है। इसमें हाई लेवल भाषा का प्रयोग प्रोग्रामिंग के लिए किया जाता है। इसमें मेमोरी के तौर पर चुम्बकीय डिस्क का प्रयोग किया जाने लगा था। इस पीढ़ी के कम्प्यूटरों की मदद से मल्टीप्रोग्रामिंग (Multi Programme), एवं मल्टी प्रोससिंग (Multi Processing) सम्भव हो गया। इस पीढ़ी के मुख्य कम्प्यूटर थे IBM-360, IBM-370 (Series), ICL-1900 एवं (Series), बरोज – 5700, 6700 तथा 7700 (Series), CDC-(3000-6000) तथा (Series) यूनिवेक – 9000 श्रृंखला, हनीवेल – 6000 तथा 200 PDP-11/45 आदि।

 

चौथी पीढ़ी (1971-1989)

कम्प्यूटर की चौथी पीढ़ी की शुरूआत 1971 से 1989 तक मानी जाती है। इस जनरेशन IC की यह तकनीकी VLSI थी इसका पूरा नाम Very Large-Scale Intergration हैं। इसमें हाई लेवल भाषा का प्रयोग प्रोग्रामिंग के लिए किया जाता है। इसमें केवल एक सिलिकॉन चिप पर कम्प्यूटर के सभी एकीकृत परिपथों को लगाया जाता है, जिस माइक्रोप्रोसेसर कहा जाता है। इस चिपों का प्रयोग करने वाले कम्प्यूटरों को माइक्रो कम्प्यूटर (Micro Computer) कहा जाता है।

 

पाँचवीं पीढ़ी

कम्प्यूटर की पाँचवी पीढ़ी की शुरूआत 1989 से मानी जाती है। इस जनरेशन में आई.सी. (I.C.) की आधुनिक तकनीकी का प्रयोग किया जाने लगया था। IC की यह तकनीक ULSI थी इसका पूरा नाम Ultra Large Scale Integration है। इसमें हाई लेवल भाषा का प्रयोग प्रोग्रामिंग के लिए किया जाता है। जो अधिक सरल है। इस भाषाओं में GUI Interface का प्रयोग किया जाता है।

 

अगली पीढ़ी के कम्प्यूटर

नैनो कम्प्यूटर

नैनो स्तर (10-9 M) पर निर्मित नैनो ट्यूब्स के प्रयोग से अत्यंत छोटे व विशाल क्षमता वाले कम्प्यूटर के विकास का प्रयास किया जा रहा है।

 

क्वांटम कंम्प्यूटर

यह प्रकाश के क्वांटम सिद्धांत पर आधारित है जिसमें आंकड़ों का संग्रहण और संसाधन क्वांटम कणों पर करते है। ये कण युग्म में रहते हैं और इन्हें क्यू बिट्स(Q – BITS) कहते हैं।

 

आविष्कारआविष्कारकसमयविशेषताएँअनुप्रयोग
अबेकस (Abacus)ली काई चेन (चीन)16वीं शताब्दी·         सबसे पहला एवं सरल यन्त्र

·         अबेकस लकड़ी का एक आयताकार ढाँचा होता था, जिसके अन्दर तारों का एक फ्रेम लगा होता था।

·         क्षैतिज (Ilarizontal) तारों में गोलाकार मोतियों के द्वारा गणना की जाती थी।

·         जोड़ने व घटाने के लिए प्रयोग किया जाता था।

·         वर्गमूल निकालने के लिए भी प्रयोग किया जाता था।

नेपियर्स बोन्स (Napier’s Bons)जॉन नेपियर (स्कॉटलैण्ड)1617·         ये जानवरों की हड्यिों से बनी आयताकार पट्टियों होती थी।

·         10 आयताकार पट्टियों पर 0 से 9 तक के पहाड़े इस प्रकार लिखे होते हैं कि एक पट्टी के दहाई के अंक दूसरी पट्टी के इकाई के अंको के पास आ जाते थे।

·         गणना के लिए प्रयोग में आने वाली प्रोद्यौगिकी को राबडोलोगिया (Rabdologia) कहते हैं।

·         गुणा अत्यन्त शीघ्रतापूर्वक की जा सकती थी।

·         गणनात्मक परिणाम को ग्राफिकल संरचना द्वारा दर्शया जाता था।

 

स्लाइड रूल (Slide Rule)विलियम ऑटरेड (जर्मनी)1620·         इसमें दो विशेष प्रकार की चिह्नित पट्टियाँ होती थीं, जिन्हें बराबर में रखकर आगे-पीछे सरकाकर लघुगणक की क्रिया सम्पन्न होती थी।

·         पट्टियों पर चिन्ह इस प्रकार होते थे कि किसी संख्या के शून्य वाले चिह्न से वास्तविक दूरी उस संख्या के किसी साझा आधार पर लघुगणक के समानुपाती होती थी।

·         यह लघुगणक विधि के आधार पर सरलता से गणनाएँ कर सकता था।

 

पास्कलाइन (Pascaline)ब्लेज पास्कल (फ्रांस)1642•    यह प्रथम मैकेनिकल एडिंग मशीन है।

•    यह मशीन ओडोमीटर एवं घड़ी के सिद्धान्त पर कार्य करती थी।

•    इस मशीन में कई दाँतेदार चक्र और पुराने टेलीफोन की तरह घुमाने वाले डायल होते थे, जिन पर 0 से 9 तक संख्याएँ अंकित होती थीं।

•    संख्याओं को जोड़ने और घटाने के लिए प्रयोग किया जाता था।

 

लेबनीज का

यान्त्रिक कैलकुलेटर (Mechanical Calulator of Leibnitz)

गोटफ्रेड वॉन लेवनीज (जर्मन)1671•    इस मशीन को लेबनीज की ‘रेनिंग मशीन’ भी कहा जाता है।•    यह मशीन जोड़ व घटाव के साथ-साथ गुणा व भाग कर सकने में भी समर्थ थी।

•    कार व स्कूटर के स्पीडोमीटर में प्रयुक्त की जाती है

जेकॉर्ड लूम

(Jacquard Loom)

जोसेफ-मेरी जैकार्ड (फ्रांस)1801•    यह एक ऐसी बुनाई मशीन थी, जिसमें बुनाई के डिजाइन डालने के लिए छिद्र किए हुए कार्डों का उपयोग किया जाता था।•    इसका प्रयोग कपड़े बुनने के लिए किया जाता था।
डिफरेंस इंजन (Difference Engine)चाल्र्स बैबेज1822•    इस मशीन में शॉफ्ट तथा गियर लगे होते थे तथा यह मशीन भाप से चलती थी।•    इस मशीन की सहायता से विभिन्न बीजगणितीय फलनों का मान दशमलव के 20 स्थानों तक शुद्धतापूर्वक ज्ञात किया जा सकता था।

•    इसके उपयोग बीमा, डाक, रेल उत्पादन में किया जाता था।

एनालिटिकल इंजन (Analytical Engine)चाल्र्स बैबेज1833•    इस मशीन के पाँच मुख्य भाग थे 1. इनपुट इकाई, 2. स्टोर, 3. मिल, 4. कंट्रोल 5. आउटपुट इकाई

•    इस मशीन को आधुनिक कम्पयूटरों का आदि प्रारूप माना जाता है। यह एक मैकेनिकल मशीन है।

•    इसका प्रयोग सभी गणितीय क्रियाओं को करने में किया जाता था।

 

टेबुलेटिंग मशीन (Tabulating Machine)हरमन होलेरिथ1880•    इसमें संख्या पढ़ने का कार्य छेद किए हुए कार्डों द्वारा किया जाता था।

•    एक समय में, एक ही कार्ड को पढ़ा जाता था।

•    सन् 1896 में होलेरिथ ने ‘टेबुलेटिंग मशीन कम्पनी’ की स्थापना की जो पंचकार्ड यन्त्र का उत्पादन करती थी।

•    सन 1924 में इसका नाम ‘इंटरनेशनल बिजनेस मशीन’ (Inernational Business Machine-IBM) हो गया।

•    इसका प्रयोग 1890 की जनगणना में किया गया था।
मार्क-1 (Mark-1)हावर्ड आइकन1930•    यह विश्व का प्रथम पूर्ण स्वचालित विद्युत यान्त्रिक (Electrormechanical) गणना यन्त्र था।

•     इसमें इंटरलॉकिंग पैनल के छोटे गिलास, काउंटर, स्विच और नियन्त्रण सर्किट होते थे।

•    डेटा मैन्युअल रूप से Enter किया जाता है।

•    संचयन के लिए मैग्नेटिक ड्रम प्रयोग किए जाते थे।

•    इसका प्रयोग गणनाएँ करने में किया जाता था।
एनिएक (ENIAC) (Electronic Numerical Integrator and Calculator)जे पी एकर्ट & जॉन मौचली1946

 

•    यह बीस Accumulators का एक संयोजन हैं।

•    इसमें 18000 वैक्यूम ट्यूब्स लगी थी।

•    यह पहला डिजिटल कम्प्यूटर था।

•    इसका प्रयोग प्राइवेट फर्मों, इंजीनियर्स रिसर्च एसोसिएशन और IBM में किया गया था।
एडसैक (EDSAC) (Electronic Delay Storage Automatic \Calculator)मौरिस विल्कस

 

1949

 

•    यह पहला प्रोग्राम संग्रहित डिजिटल कम्प्यूटर था।

•    यह वर्गों के पहाड़ों की भी गणना कर सकता था।

•    यह मर्करी डिलेय लाइनस का प्रयोग मैमोरी और वैक्यूम ट्यूब का प्रयोग लॉजिक के लिए करता था।

•    1950 में, एम वी विल्कस और व्हीलर ने जीन आवृत्तियों (Gene Frequencies) से संबधित डिफरेंशियल (Differential) समीकरण को हल करने के लिए EDSAC का इस्तेमाल किया।

•    1951 में, मिलर और व्हीलर ने एक 79 अंको के प्राइम नंबर की खोज करने के लिए EDSAC का इस्तेमाल किया।

एडवैक (EDVAC) (Electronic Discrete Variable Automatic Computer)     जॉन वॉन न्यूमैन1950

 

•    यह 30 टन बड़ा 150 फीट चौड़ा था।

 

•    यह गणनाएँ करने का काम करता था।
यूनिवैक (UNIVAC) (Universal Automatic Computer)जे प्रेस्पर एकटं और  जॉन मोचली

 

1951•    यह इनपुट व आउटपुट की समस्याओं को अतिशीघ्र हल करता था। सामान्य उद्देश्य के लिए प्रयोग किए जाने वाला प्रथम इलेक्ट्रॉनिक कम्प्यूटर।

•    यह सांख्यिकी और शाब्दिक दोनों प्रकार के डेटा को संशोधित करता था।

•    यह मैग्नेटिक टेप का प्रयोग इनपुट और आउटपुट के लिए करता था।

•    इसका प्रयोग वाणिज्यिक इस्तेमाल के लिए किया जाता था।

 

 

Facebook Comments