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Chapter-2

प्राकृतिक भूभाग

राजस्थान के भू-भाग: विशेषताओं का तुलनात्मक अध्ययन एक सारणी में

  • राजस्थान विश्व के प्राचीनतम भू-खण्डों का अवशेष है।
  • प्राक् ऐतिहासिक काल में विश्व में दो भू-भाग अंगारालेण्ड व गोंडवाना लेण्ड थे जिनके मध्य टैथिस सागर था।
  • राजस्थान के भौगोलिक क्षेत्रों का सर्वप्रथम निर्धारण वी.सी. मिश्रा ने किया तथा उन्होंने राजस्थान के सात भौगोलिक विभाग बताए।
  • वर्तमान में सर्वमान्य धारणानुसार राजस्थान में चार प्राकृतिक या भौगोलिक या भौतिक प्रदेश माने जाते है जबकि पाँच जलवायु प्रदेश है। 10 कृषि जलवायु प्रदेश है।

उत्तर-पश्चिमी मरुस्थलीय प्रदेश

  • क्षेत्रफल- राज्य के क्षेत्रफल का 61.11 प्रतिशत।
  • कुल थार मरुस्थल का लगभग 56 से 62 प्रतिशत राजस्थान में है।
  • जनसंख्या- राज्य की प्रतिशत 40 लगभग।
  • स्थिति- राजस्थान के उत्तर पश्चिम में व पाकिस्तान में सिन्ध व पंजाब तक फैला है।
  • राजस्थान के 12 जिले मरुस्थलीय क्षेत्र में सम्मिलित है- जैसलमेर, बाड़मेर, जोधपुर, जालौर, पाली, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, बीकानेर, चूरू, सीकर, झुंझुनूं, नागौर।
  • 5 सेमी. वर्षा रेखा उत्तर-पश्चिमी मरुस्थल को दो भागों में विभाजित करती है- राजस्थान बांगर व रेतीला शुष्क मैदान।
  • मरुस्थल के दो भाग-
  1. राजस्थान बांगर- इस क्षेत्र में वर्षा का औसत 20-50 सेन्टीमीटर है। इस क्षेत्र में निम्न हिस्से सम्मिलित किए जाते है-
  • घग्घर क्षेत्र
  • आन्तरिक जलप्रवाह का क्षेत्र (शेखावाटी)
  • नागौरी उच्च प्रदेश
  • गोंडवाना (लूनी बेसिन)
  1. शुष्क या उत्तर पश्चिमी विशाल मरुस्थल-वर्षा का वार्षिक औसत- 20-25 सेन्टीमीटर इसके निम्न भाग है-
  • पथरीला व चट्टानी मरुस्थल- हम्माद
  • रेतीला मरुस्थल- ईर्ग
  • मिश्रित मरुस्थल- रैग

रेतीले मरुस्थल में विविध भू-आकृतियाँ

  • बरखान- सर्वाधिक गतिशील अद्र्धचन्द्राकार बालूका स्तूप। सर्वाधिक शेखावाटी में है।
  • अनुदैध्र्य बालूका स्तूप- पवनों की दिशा के समान्तर बने बालूका स्तूप। सर्वाधिक जैसलमेर में है।
  • अनुप्रस्थ बालूका स्तूप- पवनों की दिशा के लम्बवत् चलने वाले बालूका स्तूप। सर्वाधिक बाड़मेर में है।

तथ्य

  • थार का घड़ा- चन्दन नलकूप (जैसलमेर के पूर्व में, मीठे पानी के लिए)
  • अरावली का वृष्टि छाया प्रदेश होने से बंगाल की खाड़ी का मानसून वर्षा नहीं करता।
  • जलवायु- शुष्क व अत्यधिक विषम
  • मिट्टी- रेतीली बलुई
  • सामान्य ढ़ाल- पूर्व से पश्चिम व उत्तर से दक्षिण
  • मुख्य फसलें- बाजरा, मोठ, ज्वार
  • वनस्पति- बबूल, फोम, खेजड़ा, कैर, बेर, सेवणघास (मरुद्भिद्)
  • थली के नाम से भी जानते है जो ‘ग्रेटपेलियो आर्कटिक अफ्रीकी मरुस्थल’ का पूर्वी भाग है।
  • सर्वाधिक आबादी व जैव विविधता का मरुस्थल।
  • रन/टाट- इस सम्पूर्ण रेगिस्तान में बालूका स्तूपों के बीच कहीं-कहीं निम्न भूमि मिलती है जहाँ वर्षा का जल भर जाने से अस्थाई झीलें व दलदली भूमि बनती है। जिसे रन या टाट कहते हैं। ब्रह्मसर, कनोड़, भाकरी, लवा, पोकरण (जैसलमेर) लावा, बाप (जोधपुर) धोब (बाड़मेर) व तालछापर (चूरू)।
  • ग्रीष्म में न्यून वायुदाब का केन्द्र विकसित होता है।
  • प्राचीन समय से सरस्वती नदी के बहने के प्रमाण मिलते है।
  • मावट- सर्दियों में भूमध्य सागर के पश्चिमी विक्षोभों के कारण उत्तरी व पश्चिमी मरुस्थलीय क्षेत्रों में होने वाली वर्षा। इसे गोल्डन ड्रॉप्स कहते है। रबी की फसलों में सहायक है।
  • पीवणा- राजस्थान के पश्चिमी भाग में पाया जाने वाला सर्वाधिक विषैला सर्प।
  • समगांव (जैसलमेर)- पूर्णतया वनस्पति रहित क्षेत्र।
  • राजस्थान का एकमात्र जीवाश्म पार्क- आकल (जैसलमेर)

मध्यवर्ती अरावली प्रदेश

  • क्षेत्रफल- राज्य के क्षेत्रफल का 9.1 प्रतिशत
  • जनसंख्या- 10 प्रतिशत
  • अरावली पर्वतमाला- गोंडवाना भूखण्ड का भाग
  • विस्तार- दक्षिण-पश्चिम में गुजरात के खेडब्रह्मा/पालनपुर से उत्तर पूर्व में दिल्ली की रायसीना हिल्स तक अरावली की श्रंखलाएं जाती है। राजस्थान में दक्षिण पश्चिम में माउंट आबू (सिरोही) से उत्तर पूर्व में खेतड़ी (झुंझुनूं) तक विस्तार है।
  • कुल लम्बाई- 692 किलोमीटर, जिसमें से राजस्थान में अरावली पर्वतमाला की लम्बाई- 550 किलोमीटर (लगभग 80 प्रतिशत)
  • विश्व की प्राचीनतम वलित पर्वतमाला है।
  • जिले- सिरोही, उदयपुर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़, राजसमंद, अजमेर, जयपुर, दौसा, अलवर, झुंझुनूं आदि।
  • अरावली पर्वतमाला में स्थित दर्रे- हाथीगुड़ा, दिवेर, कच्छवाली, सरूपाघाट, बर सोमेश्वर केवड़ानाल, जीलवाड़ा, नाल/पगल्यानाल।
  • मध्यवर्ती अरावली पर्वत श्रेणियों में स्थित दर्रे व पहाड़ी भाग नाल कहलाते है।
  • जीलवाड़ा नाल मारवाड़ से मेवाड़ में आने का रास्ता प्रदान करती है। इसे पगल्या नाल कहते है।
  • भाकर- पूर्वी सिरोही क्षेत्र में अरावली की तीव्रढ़ाल वाली व ऊबड़-खाबड़ पहाडि़यों को स्थानीय भाषा में भाकर कहते है।
  • राजस्थान में अरावली पर्वतमाला की समुद्रतल से औसत ऊँचाई 930 मीटर है। अरावली पर्वतमाला का सर्वाधिक विस्तार, ऊँचाई व चौड़ाई दक्षिण-पश्चिम में है।
  • अरावली श्रेणियों की चौड़ाई व विस्तार उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम की ओर बढ़ते है।
  • अरावली पर्वत श्रंखला में राज्य में सबसे कम विस्तार अजमेर जिले में है। सर्वाधिक विस्तार उदयपुर में है।
  • राजस्थानी भाषा में अरावली पर्वत श्रंखला को Ada-Vata कहते है। जिसका अर्थ है ष्। ठमंउ स्लपदह ंबतवेेष् पर्वत श्रंखला का अधिकांश भाग उदयपुर, बांसवाड़ा, डूंगरपुर में है।
  • वर्षा- औसतन 50 सेन्टीमीटर से 80 सेन्टीमीटर
  • अरावली पर्वतमाला, राज्य में जल विभाजक रेखा या क्रेस्ट लाईन का कार्य करती है।
  • सर्वाधिक वर्षा का स्थान- माउन्ट आबू (150 सेमी.)
  • सर्वाधिक वर्षा वाला जिला- झालावाड़
  • अरावली के ढ़ाल पर मुख्य खेती- मक्का
  • जलवायु- उपआर्द्र
  • सर्वाधिक ऊँची पर्वत चोटी- गुरुशिखर (1722-1727 मीटर)
  • हिमालय व नीलगिरि के मध्य स्थित सर्वाधिक ऊँची इस गुरुशिखर चोटी को कर्नल टॉड ने सन्तों का शिखर कहा है। यह हिमालय व नीलगिरि के मध्य की भारत की सर्वोच्च चोटी है।
  • गुरुशिखर के बाद क्रमशः पर्वत चोटियाँ-

सेर (सिरोही) – 1597 मीटर

देलवाड़ा (सिरोही) – 1442 मीटर

जरगा (उदयपुर) – 1431 मीटर (भोराट के पठार में)

अचलगढ़ (सिरोही) – 1380 मीटर

पूर्व मैदानी प्रदेश

  • क्षेत्रफल- 23.3 प्रतिशत (राज्य का) लगभग
  • जनसंख्या- 39 प्रतिशत
  • जनसंख्या घनत्व- सर्वाधिक (चारों प्राकृतिक प्रदेशों में)
  • मिट्टी- जलोढ़ व दोमट
  • वर्षा- 50-90 सेन्टीमीटर औसतन
  • जलवायु- आद्र
  • ढ़ाल- पूर्व में
  • मुख्य विशेषता- चम्बल के बीहड़ – चम्बल के प्रवाह क्षेत्र में मिट्टी के कटाव के कारण गड्डे बने है, जो बीहड़ या खादर कहलाते है। चम्बल के बीहड़ों का विस्तार सवाई माधोपुर, करौली व धौलपुर में अधिक है। धौलपुर में सर्वाधिक बीहड़ भूमि है।

दक्षिण-पूर्वी पठार

  • राजस्थान के दक्षिण-पूर्वी क्षेत्र (कोटा, बूंदी, बारां, झालावाड़) में विस्तृत।
  • अघर अस्पष्ट प्रवाह का क्षेत्र
  • क्षेत्रफल- 7 प्रतिशत लगभग
  • जनसंख्या- 11 प्रतिशत लगभग
  • हाड़ौती का पठार, लावा का पठार, दक्कन का पठार आदि उपनाम है तथा मालवा के पठार का ही भाग है।
  • वर्षा- 80-120 सेन्टीमीटर
  • जलवायु- अतिआर्द्र
  • मिट्टी- काली उपजाऊ मिट्टी, जिसका निर्माण प्रारम्भिक ज्वालामुखी चट्टानों से हुआ है। लाल कछारी मिट्टी भी है।
  • धरातल- पथरीला/चट्टानी
  • यह पठारी भाग अरावली व विंध्याचल का संक्रांति प्रदेश है।
  • उडि़या पठार (सिरोही)- राजस्थान का सबसे ऊँचा पठार – 1360 मीटर की ऊँचाई पर।
  • आबू पठार (सिरोही)- राजस्थान का दूसरा बड़ा पठार ऊँचाई – 1200 मीटर।
  • भोराट का पठार- तीसरा बड़ा पठार – गोगुन्दा (उदयपुर) से कुम्भलगढ़ (राजसमंद) – ऊँचाई 1155 मीटर।
  • मेसा पठार- 620 मीटर ऊँचाई, चित्तौड़ का किला इसी पर है।

महत्त्वपूर्ण तथ्य

  • खादर- चम्बल बेसिन में 5 से 30 मीटर गहरी खड्ड युक्त बीहड़ भूमि को स्थानीय भाषा में खादर कहते हैं।
  • धोरे- लहरदार आकृति के बड़े टीले (रेतीले धोरे)
  • लघु मरुस्थल (लिटिल रन)- कच्छ से बीकानेर तक फैला हुआ है। (थार का पूर्व भाग)
  • लूनी बेसिन- अजमेर के दक्षिण-पश्चिम से अरावली के पश्चिम में विस्तृत लूनी नदी का प्रवाह क्षेत्र।
  • बीहड़ भूमि या कंदराएं- चम्बल के द्वारा मिट्टी के भारी कटाव के कारण प्रवाह क्षेत्र में बनी गहरी घाटियाँ व टीले। राजस्थान व मध्यप्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्र में है।
  • खड़ीन- जैसलमेर के उत्तर दिशा में स्थित प्लाया झीलें, जो निम्न कगारों से घिररी रहती है। पालीवाल झीलें, जो निम्न कगारों से घिरी रहती है। पालीवाल ब्राह्मणों के बनाए जल क्षेत्र खड़ीन कहलाते है।
  • धरियन- जैसलमेर के जन-शून्य भाग में स्थानान्तरित बालूका स्तूपों का स्थानीय नाम।
  • बीजासण पहाड़- मांडलगढ़ (भीलवाड़ा) के कस्बे के पास।
  • भभूल्या- राजस्थान में छोटे क्षेत्र में उत्पन्न वायु भंवर/चक्रवात भभूल्या कहलाते है।
  • पुरवईयां- बंगाल की खाड़ी से आने वाली मानूसनी हवाओं का स्थानीय नाम।
  • वज्र तूफान- राजस्थान का पूर्वी भाग अधिक प्रभावित है।
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